User Submitted Post

शादी के कुछ साल ठीक चले। नोक-झोंक होती थी, पर हम दोनों साथ में ही सब संभाल लेते थे। मुझे लगता था सब ठीक है, हमारी लाइफ ठीक चल रही है।
पर पता नहीं कब से वो बदलने लगी।

पहले वो हर बात शेयर करती थी, अब कुछ भी नहीं बताती थी।
फोन हमेशा हाथ में… किसी का मेसेज आए तो जल्दी से स्क्रीन बंद कर देती।
मैं पूछता तो बोल देती-
“तुम्हें हर बात में शक क्यों होता है?”

धीरे-धीरे उसने मुझसे बात करना भी कम कर दिया।
घर में रहती थी, पर ऐसा लगता था जैसे मैं उसके लिए कोई हूं ही नहीं।

एक दिन उसका फोन बाथरूम में बज रहा था।
मैंने देखा-एक लड़के का नाम था, साथ में लिखा था “Baby ”.
दिल बस धक से रुक गया।
मैंने कुछ नहीं किया, बस वहीं बैठा रहा।

वो बाहर आई, तो मैंने धीरे से पूछा-
“कौन है ये?”
वो बिना किसी शर्म के बोली-
“जिससे मुझे सच में प्यार है।”

उसके बाद हर दिन झगड़े, चिल्लाना, रोना…
मैं संभालने की कोशिश करता था, पर उसे जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था।
वो रात-रात भर फ़ोन पर रहती, और मैं बस कमरे में बैठा सोचता रहता था कि मैं इतना खराब क्या हूँ?

एक दिन उसने कहा—
“मेरी लाइफ में कोई और है… मैं उसके साथ खुश हूँ।”
और बस, अपना सामान लेकर चली गई।
ना पलटकर देखा, ना पूछा मैं ठीक हूँ या नहीं।

अब घर में बहुत सन्नाटा है।
उसके बिना सब खाली-खाली लगता है।
चाय बनाते हुए उसकी आदतें याद आती हैं
खाना खाते-खाते थाली छोड़ देता हूँ।
रात को नींद नहीं आती।

कई बार फोटो खोलकर बैठ जाता हू/
बस उसे देखता रहता हूँ।
सोचता हूँ,
कहां कमी रह गई मुझमें? क्या इतना भी लायक नहीं था मैं?

लोग कहते हैं समय सब ठीक कर देता है,
पर सच बताऊ,
मैं आज भी वहीं अटका हूँ,
जहां वो मुझे छोड़कर चली गई।

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